प्राचिन मुंबई महाराष्ट्रस्थित आद्य कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणीयों का अज्ञात अकल्पित गूढरम्य ईतिहास !

प्राचिन मुंबई महाराष्ट्रस्थित आद्य कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणीयों का अज्ञात अकल्पित गूढरम्य ईतिहास !

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-नागवंशी नंदकुमार सुभद्रा चांगदेव कासारे


नागनगर अपरंत अर्थात मुंबई स्थित कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणीयों के 4 ईतिहासिक थेरस्मृतिस्तूपों का स्वर्णिम भारतीय धरोहर.

नागनगर अपरंत अर्थात मुंबई मे अंधेरी पूर्व यहा 220 फूट ऊँचे वेरावली पर्वत स्थित प्राचिन कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणीयों का अनुपम नागवंशिय विरासत है.

BC 247 में नागनगर मुंबई के मूलनिवासी बुध्दधम्मीय नागशासक नंदनाग और ऊपनंदनाग नागराजबंधूओं ने ईस कलाविष्कारों की प्रारंभिक निर्मिती की थी. जो आज मुंबई महानगर का विश्वप्रसिध्द बुध्दधम्मीय केंद्रबिंदू है.

कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणीयाँ मे नागनगर अपरंत का सुप्रसिध्द धम्ममहाविद्यालय था, जहा सैकडो भारतीय श्रामणेरों को बुध्दधम्म के अनेक कला शास्त्रो की परिपूर्ण शिक्षा दी जाती थी. ऊसका प्रमाणण यहापे सन 2 रे शतक से 6 वे शतक कालखंड में अनेक थेरस्मृती स्तूप थे. जो यहा के विभिन्न कला शास्त्र के आचार्यो के अस्थिरक्षाओं पर स्थापित है .


यहा लेणीयों के पर्वतमाथे पर जो विशाल लंबगोलाकारी शिखर है, वहा 30 फूट परिघ का एक भव्यदिव्य महाथेरस्मृती स्तूप है. जिसका तलन्यास काले बँसाँल्ट पाषाणी शिलाखंड से युक्त है तथा ऊप्पर का 10 फूट ऊँचा शिरोभाग मूल लाल मुत्तिकाखंडो अर्थात ईटोंसे संपन्न था. दु:खद है की अब ईस पवित्र धरोहर का केवल तलन्यास दर्शनीय है.

दुसरा थेरस्मृतीस्तूप यह लघु आकारमानी और चौरस है, जो ईस महाथेरस्तूप के निकट ही स्थापित है, जो 5 फूट चौकोन का है. ईसका भी मूल लाल ईटों का शिरोभाग पूर्णत: धस्त है, अब केवल काले पाषाणी तलन्यास दिखता है.

तिसरा थेरस्मृती स्तूप यह लेणे क्र. 1 के ऊपरी शिखर पर स्थापित था, जिसका आकारमान 8 फूट चौरस था, खेदजनक यह है की अब यह भी थेरस्मृती स्तूप पूर्ण खंडित ऊध्वस्त स्वरूप ऐसे शिलाखंडो अवशेष मे है.

चौथा महास्थाविर स्तूप यह लेणे क्र 8 के सामने ग्रीन लाँन में निर्मित था. जो 20 फूट गोलाकार परिघ का था. ईसका भी तलन्यास काले पाषाणखंडो का था और ऊँचा शिरोभाग लाल मुत्तिकाखंडो से सुशोभित था. यह बुध्दधम्मी धरोहर भी अब पूर्णतया धस्तस्वरूप मे है.

आज के स्वर्णिय दिन पर मै, कोंडिण्य बुध्दलेणीयों के प्राचिन महाधम्मविद्यालय के वंदनीय परित्यागी 4 आचार्यो को ईस थेरस्मृतीस्तुपो के अदभूत लेखनद्वारे ह्रदयस्थ अभिवादन करता हूँ.


नागवंशी नंदकुमार सुभद्रा चांगदेव कासारे

नागनगर अपरंत : अंधेरी मुंबई
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संस्थापक : नागवंशी बुध्दिस्ट किंगडम अभियान

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