कोंडिविटे बुद्धलेणे अंधेरी मुंबई यहाँ विश्वविक्रमी 402 वी चतुर्थ शतकी दो महाबुध्दवंदना संपन्न हुई.

नागवंशी प्रबुध्द भारत साकार हो रहा है.
PART – 129

★रविवार को कौंडिण्य : कोंडिविटे बुद्धलेणे अंधेरी मुंबई यहाँ विश्वविक्रमी 402 वी चतुर्थ शतकी दोन महाबुध्दवंदना संपन्न हुई.

★नागवंशी बुध्दिस्ट किंगडम अभियान के विद्दमानसे 1 ऑगस्ट 2010 से सलग 8 वर्ष अखंडित 401 रविवार ( YES ! GREATEST CELEBRATION OF NONSTOP 401 BUDDHIST SUNDAY !!! ) को महाराष्ट्र में बुध्दलेणीयों और नागस्थलों पर नागवंशी बुध्दसंस्कृती के सम्मानार्थ महाबुध्दवंदना श्रध्दापूर्वक संपन्न हुई है.

★प्राचीन नागनगरी मुंबई के बुध्दधम्मीय नागशासक उपनंदनाग और नंदनाग यह नागराजबंधूओने अंधेरी पूर्व यहाँ बीसी 245 मे कौंडिण्य – कोंडिविटे बुध्दलेणीयो की निर्मिती की.

★ रविवार 8 एप्रिल 2018 : बुध्दाब्द 2561 के महामंगलदिन को दोपहर 2 बजे कौंडिण्य: कोंडिविटे बुध्दलेणे ; अंधेरी पूर्व मुंबई यहाँ के पुण्यकारक चैत्यगृह मे पृथ्वीतल की अखंडित विश्वविक्रमी 402 वी चतुर्थ शतकी दोन महाबुध्दवंदना निश्ठापूर्वक संपन्न हुई, जिसकी विशेषताए ईसप्रकार अलौकिक है.

★ सर्वप्रथम सभी उपासकोंओने दस मिनटों का अदभूत मेडीटेशन स्वस्थचित्त से शांतिपूर्वक किया , जिससे उन्हे बुध्दिस्ट पाँवर का अनूठा लाभ हुआ.

★पश्चात सभी उपासकोओ ने सामूहिकता से पवित्र बुध्दप्रतिक ऐसे चैत्यस्तूप को विनम्रतासे पंचागप्रणाम किया, पश्चात धीरगंभीर मंगलसूरों मे पालि धम्मभाषायुक्त त्रिसरणं , पंचशिल, नागलोकगाथा, भीमस्तूती, बुध्दवंदना, धम्मवंदना, संघवंदना, संकल्पगाथाओ का ग्रहण किया, जिससे चैत्यगृह मे पवित्र बुध्दतरंग निर्माण हुऐ.

★सन्माननीय अतिथी डाँ शशिकांत चंदनशिवे, ऐडव्होकेट सूर्यकांत बाबर,तथा बुध्दअनुयायी गुरूनाथ सावंत इन्होंने महामंगल बुध्दधम्म और 402 वी महाबुध्दवंदनाके विषय मे अदभूत मनोगत कथन किया, जिससे सभी प्रभावित हुऐ.

 

★संस्थापक नागवंशी नंदकुमार कासारे ने डाँ शशिकंत चंदनशिवे, एडव्होकेट सूर्यकांत बाबर, भिकाजी कांबले, गूरूनाथ सावंत यह चार आदरणीय बंधूओ को ब्राम्ही बुध्दिस्ट कँलिग्राफी युक्त उनके नामों के पोस्टर उपहारस्वरूप दिये. ईसप्रकार बुध्दिस्ट ब्राम्ही कँलिग्राफी के उद्गाते और महान विश्वलेखक तथा विराट भारत देश के चक्रवर्ती बुध्दसम्राट प्रियदर्शी अशोक मौर्य ईन्हे अलौकिक अभिवादन किया गया.

★अंतिमत: हुतात्मा नागवंशी वीरसैनिको और शूर भीमसैनिक भाई संगारे तथा विरांगना प्रियांका भोतमांगे के वीरस्मृतीप्रित्यर्थ सभी अनुयायीयोंने खडे होकर ने दो मिनटो का मूक अभिवादन किया. पश्चात सामूहिक धम्मपालन गाथा और सरणंतय गाथा के ग्रहणता से इस पारंपारिक 402 वी महाबुध्दवंदना के ईतिहासिक नागवंशीय बुध्दसमारोह की अपूर्व सांगता दोपहर की 35 डिग्री तप्ती कडी धूप मे भी अपार बुध्दनिष्ठा से हुई.

★अंतिमत: नागवंशी कासारे ने सभी उपासकोओ को कोंडिविटे बुध्दलेणीयो के समुच्च दर्शनसहित ईतिहास, लेणीस्थापत्य, वर्षाजलप्रणाली, ब्राम्ही सिलालेख का सखोल विस्तुत धम्मज्ञान अवगत कराया.

★नागवंशी बुध्दअनुयायीयो… आप सबको विनती है कृपा करके शुभ्र वस्त्रों परिधान सहित रविवार 15 एप्रिल को दोपहर 2 बजे , कौंडिण्य : कोंडिविटे बुध्दलेणे अंधेरी मुंबई यहाँ 403 वी महाबुध्दवंदना के अलौकिक पारंपारिक नागवंशीय बुध्दसमारोह को उपस्थित होकर प्रबुध्द भारत देश में हमारे महान गौरवशाली नागबुध्दसंस्कृती का पुनरूत्थान अवश्य करे.

★रविवार को हम करे बुध्दलेणीयो मे बुध्दवंदन !! रविवार को हम त्याग करे पक्वान मनोरंजन !!

★नागवंशी नंदकुमार कासारे
संस्थापक : नागवंशी बुध्दिस्ट किंगडम अभियान
9867106355

 

One thought on “कोंडिविटे बुद्धलेणे अंधेरी मुंबई यहाँ विश्वविक्रमी 402 वी चतुर्थ शतकी दो महाबुध्दवंदना संपन्न हुई.”

  1. आपल्या स्तुत्य उपक्रमास हार्दिक शुभेच्छा, लेणी संवर्धन आणि बुद्ध धम्म प्रसार व प्रचार कार्यास मंगल कामना. नमो बुध्दाय, जय अशोक, जयभीम.

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